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मुंबई हमले के समय कहां थे मराठी?

Posted On: 24 Jan, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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हमारा संविधान संप्रभु है। यह सभी भारतीय नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान करता है। परंतु, विडंबना यह है कि बिहार का नागरिक कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता। नगालैंड में घर नहीं बना सकता और अब महाराष्ट्र में टैक्सी नहीं चला सकता?  हां, कश्मीर में जमीन खरीदने और नगालैंड में घर बनाने के लिए यदि ऊंची पैरवी है तो सपना पूरा हो सकता है। यानी सारे नियम-कानून गरीब व मध्यम वर्ग के लिए?  ऊंच वर्ग के लोगों के लिए नियम के ऊपर नियम। महाराष्ट्र सरकार ने बीस जनवरी 2010 को मनसे प्रमुख राज ठाकरे के नक्शे कदम पर चलते हुए यह जताने का प्रयास किया था कि वह मराठियों की हितैषी है। इसके लिए महाराष्ट्र के कैबिनेट ने टैक्सी के परमिट मामले में एक बड़ा फैसला किया। टैक्सी का परमिट उसे ही दिया जाएगा, जिसे मराठी पढऩे-लिखने और बोलने आएगा। इसके अलावा वह महाराष्ट्र में पन्द्रह सालों से रहता हो। इस फैसले से देश के सभी लोग स्तब्ध। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार है। इसके बावजूद केन्द्र सरकार की चुप्पी ने सबकुछ बयां कर दिया। कसूर किसका, केन्द्र या राज्य या फिर राजनीति स्वार्थ का। गए दिनों राज ठाकरे के लोगों ने बिहारी टैक्सी चालकों की खुलेआम पिटाई की थी। केन्द्र यह सब मूकदर्शक हो देखती रही थी। इसके बाद भी मनसे के तेरह विधायक जीत गए। इससे साबित हो रहा है कि ‌हावी हो रहा क्षेत्रवाद। केन्द्र सरकार चाहकर भी इसपर अंकुश नहीं लगा पा रही है। वजह सरकार के कई पांव, एक भी बैठा तो औंधे मुंह गिरना तय। हालांकि जब देश भर में महाराष्ट्र सरकार के फैसले की छीछालेदर शुरू हुई  तो अगले ही दिन मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण पलटते दिखे। कुछ भी हो,  इस तरह की हरकतों से देश के संविधान पर अंगुली उठती है। विदेशी मुल्कों में भारत की शाख पर धब्बा लगता है? 2008 में 26 दिसंबर को जब पाक आतंकियों ने मुंबई घेर लिया था और दो सौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। उस वक्त राज ठाकरे और उनके लोगों ने मराठावाद का नारा क्यों नहीं दिया? भारतीय सुरक्षाकर्मी यदि उस वक्त मैदान में नहीं उतरे होते तो मुंबई को तीन दिनों में आतंकियों से छुटकारा नहीं मिलता। उस वक्त महाराष्ट्र की मदद करनेवाला न तो मराठी था और न ही मुंबई निवासी। मदद करनेवाला सुरक्षाकर्मी सिर्फ भारतीय और सिर्फ भारतीय थे। तब, क्यों नहीं राज ठाकरे आगे आए ? क्यों नहीं महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री आगे आए?  तब सबको जान का खतरा था। कुछ राजनैतिक ताकतें क्षेत्रवाद को बढ़ावा दे रही हैं। महाराष्ट्र सरकार इस मामले में कुछ ज्यादा ही आगे है। महाराष्ट्र सरकार को इस बात का अहसास होना चाहिए कि महाराष्ट्र में देश के कोने-कोने के लोग रहते हैं, सभी की मिली-जुली मेहनत से आज का फला-फुला महाराष्ट्र है। क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ केन्द्र को कड़े कदम उठाने चाहिए। नहीं तो एक दिन आएगा, जब राजनीतिक स्वार्थ के चलते हर राज्य में क्षेत्रवाद का बीज पनपेगा। और, इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा।

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Valjean के द्वारा
October 17, 2016

I love reading these articles because they’re short but inaeimftrvo.

Jotiram Tanaji Gidde के द्वारा
November 26, 2013

I am not a follower of raj thakarey but I sincerely think that you should mind your language…. ”उस वक्त महाराष्ट्र की मदद करनेवाला न तो मराठी था और न ही मुंबई निवासी।” this is what youटना said. let me remind you that Shahid Tukaram Omabale who helped in catching ajmal kasab was a maharashtiya and a mumbaikar! shahid vijay salaskar,shahid hemant karkare, shahid asok kamate were maharashriya and mumbaikrs. IPS Vishvas nangare-patil, who was given the gallantry award for his service during the 26/11 terror attack, is a maharashriya and a mumbaikar and all of them are ”true marathas” who faought with bravery!!! and talking about ”bharatiya surkashkarmi”, when there is a threat of national level, every protection force person works for the national safety an not for their own regions. And let me remind you, ”The Maratha Light Infantry was formed in 1768, making it the most senior light infantry regiment of the Army.” so we know how the forces work for the nation !! and talking about ”bharatiya surakshakarmi”,

s.p.singh के द्वारा
August 24, 2010

रवि भैया शायद आपको पता नहीं राज ठाकरे और उसके ताऊ तथा बड़े भाई मानसिक रूप से बीमार हैं और शायद वह शिव सैनिक के रूप में यह समझते है की उनकी फैमिली ही शिवाजी का अवतार हैं \\ पता नहीं वह अपने को मराठा किस प्रकार से सिद्ध करने की कोशीस में लगे रहते है जब की वह और उनके पूर्वज मध्य प्रदेश के इंदोर के रहने वाले थे जिस प्रकार वह और उनके पूर्वज रोजी रोटी की तालाश में मुंबई आकर बस गए थे उसी प्रकार से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी लोग भी अपने बच्चों के पेट भरने के लिए मुंबई तथा महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों में निवास कर रहे हैं तथा किसी भी स्थानीय व्यक्ति से अधिक मराठी हैं? ठाकरे एंड कंपनी को केवल पढ़े लिखे तथा व्यापर करने वाले गैर मराठी लोंगो से ही दुश्मनी है मजदूरों से उन्हें कोई गुरेज नहीं है क्योंकि स्थानीय मराठी शारीर तोड़ मेहनत का कार्य नहीं कर सकता तो बढ़ी -२ बहु मंजिल इमारतें कौन बनाएगा वैसे भी वह तो केवल हफ्ता वसूली करने वालों के विरोध में ही खड़े हुए थे तथा वह कार्य जब अपने पास ही है तो विरोध करने का कुछ साधन तो चाहिए ही ठाकरे एंड कंपनी शेर की तरह केवल मुंबई और महाराष्ट्र में ही दहाड़ सकते हैं महाराष्ट्र के बहार भी तो बहुत बढ़ा देश है कभी कुएं से बहार भी झांक कर देखो तो पता चलेगा की शारीर की चड्ढी भी उतर जायगी वैसे तो यह सब वोट बैंक की ही राजनीती है इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं पर इसकी चपेट में केवल गरीब ही मरता है अत; सरकार को चाहिए की ऐसे लोगों पर देश द्रोह का मुकद्दमा चलाना चाहिए जो देश में वैमनष्य फैलाते हैं और इनका एक ही स्थान होना चाहिए जेल वैसे ठाकरे एंड कंपनी को मेरा निमंत्रण की कभी वह उत्तर प्रदेश के मेरठ में आयें तथा मेरा अतिथित्य स्वीकार करे तो उनको सौहार्द पूर्वक व्यहार एवं रहने का सलीका पता चलेगा []]]]]]]]] एस.पी. सिंह , मेरठ

vijendrasingh के द्वारा
August 15, 2010

राज ठाकरे पर देशद्रोह का मुकद्दमा लगाकर तुरंत उस जैसे सत्ता के भूके भेड़िये को पिंजरे में दाल देना चाहिए !

    Piyush के द्वारा
    August 15, 2010

    विजेंद्र भाई राज ठाकरे को जेल में दाल देने से ये समस्या नहीं हल हो सकती तब कोई नया राज ठाकरे आ जाये गा ये समस्या हम को खुद हल करनी है. जब तक हम बाटने वाली राजनीती करने वाले लोगो को एक भी वोते देते है तब तक इस समस्या का कोई हल नहीं है……….. हमे इनको जाताना होगा की हमारे लिए क्षेत्र से उप्पर ये देश है…………………………. जय हिंद ……………. जय भारत…………..

anilkumarbakshi के द्वारा
February 14, 2010

raviji, why you are behaveing like raj and bal,marathas are also indians like biharies, do you think raj or bal are serving the cause of marathas, do you think that talibans are serving the cause of muslims, do u remember the opening words of film patton i think those were “no bastard has ever won a war by dying for his country” har koi chahta hei ek mutthi aasman,the happiest moment for raj and bal will be when a maratha gets killed,and their vote banks unite, if we try to unite hindues(for the purpose of getting their uhcut vote bank) we shall be the happiest persons if hindues are put to trouble,muslims leader ship feel happy when muslim common men are in trouble, if lalloji didn’t bake his bread by alineating yadavs and muslim from others, we the commoners are at best, the fuel for the ovens of political parties. bakthacrey is running his political train in back gear, he was respected by indians, then he was respected by hindus, now he is respected?by like minded marathas, by those marathas who may not be in love with hindues or bharties, time has already come when he can coviniently find his opponents even at matoshree, donot forget raj,and smita, the days are not far when he will meet his aurangzeb at matoshree itself, acouplet from Iqbal, tumharri tehzeeb apnei khanzar sei aap khudkushi kar legi, jo shakei naazuk pei aashiyan hoga napaidar hoga. tulsidas has said bandhuin bahori bahugan satibhaien, jo bin kaaj na dahein baayein——————–udaiketu sam hit sabhikei, kumbhkaran sam sovat neeke,

Satendar chaudhary के द्वारा
January 28, 2010

such type of person can only break India.Goverment also support them.

SANJAY. के द्वारा
January 28, 2010

बेहतर, अगले पोस्ट का रहेगा इंतजार।

agastee के द्वारा
January 25, 2010

Nice. Excellent Post and view points

ragni, delhi के द्वारा
January 25, 2010

अच्छा लगा, अगले पोस्ट का इंतजार

brajesh के द्वारा
January 25, 2010

रविकांत, राजठाकरे अपनी इन्हीं हरकतों के चलते आज अनगिनत मुकदमे में फंस गए हैं। महाराष्ट सरकार भी यदि राज की राह पर चल रहे हैं तो इसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना होगा

sunil के द्वारा
January 25, 2010

mumbai sab ka hai. yah baat marathiyon ko har hal men samjhana hoga.

richa के द्वारा
January 25, 2010

netawon ki bakhiya udherati report

anand, muzaffarpur के द्वारा
January 24, 2010

रविकांत, काश राजनीति स्वार्थ से ऊपर उठकर हर नेता सोचता तो भारत आज विकसित देश होता।

omnamh1978 के द्वारा
January 24, 2010

म आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ .राज ठाकरे या बाल ठाकरे ने अपनी क्सेत्र्वादी सोच के कारन आज क्या पाया है वे तो आज तक महारास्ट्र से बहार निकल ही पाए है इन जसे नेताही आज की राजनीति और हमारे भारत के लिए अभिशाप हैं

shashwat के द्वारा
January 24, 2010

very nice

Dr. Rajeev Anand के द्वारा
January 24, 2010

Ravi je, who gets the goal is always looking ahead, like the article.

siddarth, mumbai के द्वारा
January 24, 2010

Ravi Kant, I saw your Blog on the Google. Glad to read that again you have started writing

rajeshwar, delhi के द्वारा
January 24, 2010

रविकांत सर, बढ़िया लेख; पसंद आया

rajesh के द्वारा
January 24, 2010

रविकांत जी, तब बिल में दुबके हुए थे मराठी और राजठाकरे


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