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अहंकार ने हराया, स्वार्थ ने डुबोया

Posted On: 3 Dec, 2010 Others में

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इतिहास गवाह है कि अहंकार रावण का भी नहीं रहा। सच भी है-लोग मानते भी हैं-स्वीकारते भी हैं। बावजूद भूल पर भूल करते हैं। कम ही लोग होते हैं, जो लक्ष्मी-सरस्वती के दर्शन के बाद भी सामान्य रह पाते हैं। वर्ना, अहंकार में चूर लोग खुद को औरों से अलग समझने लगते हैं। यहीं से शुरू होता है पतन का रास्ता। क्यों हम पतन का रास्ता चुनें? क्यों यह मानें कि मृत्यु व दुख से हम परे हैं? इसी तरह की भूल ने राजद सुप्रीमो को आज कहां से कहां पहुंचा दिया। यह बात किसी से छिपी नहीं है। मीडिया के सामने गरजने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, आज मुंह छुपा रहे हैं। इसका जिम्मेदार कोई और नहीं खुद लालू ही हैं। अहंकार ने इन्हें गए लोकसभा में हराकर 4 सीटों पर लाकर खड़ा कर दिया। यूं कहें कि हरा दिया तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, वहीं इनके स्वार्थ ने बिहार विधानसभा चुनाव 2010 में 22 सीटों पर लाकर खड़ा कर दिया। यानी पूरी तरह डुबो दिया। 1993 में लालू भगवान की जय के नारे लगते थे और वे मुग्धभाव में सुनते रहते थे। यही नहीं, उन्होंने खुद को राजा तक कहना शुरू कर दिया था। खुद को वे भगवान कृष्ण का वंशज मानने लगे थे। अच्छे दिनों में इनके मुंह से आग निकलती थी। आज लालू प्रसाद की धर्मपत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी दो-दो जगहों से चुनाव हार गईं, यह कोई मामूली बात नहीं है। 2004 के विस चुनाव परिणाम आने के बाद लालू चाहते तो लोजपा सुप्रीमो की मदद से सरकार बना सकते थे। लेकिन ये इस बात पर अड़े रहे थे कि राबड़ी देवी ही मुख्यमंत्री बनेंगी। तब रामविलास पासवान की जिद थी कि कोई मुसलमान मुख्यमंत्री हो। इस जिद ने बिहार को फिर चुनाव की भट्ठी में झोंक दिया। पुन: 2005 में नीतीश सरकार सत्ता में आई और शुरू हो गया लालू का पतन। हालांकि, पतन की ओर लालू ने उसी दिन चलना शुरू कर दिया था, जब चारा घोटाले में जेल जाने से पूर्व राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। इन्हें राजद के किसी नेता पर भरोसा नहीं था। या यूं कहें कि किसी हालत में सत्ता को खोने का रिस्क नहीं उठाना चाहते थे। इनका साथ दे रहे और भाई बनने का स्वांग रच रहे लोजपा सुप्रीमो रामविलास भी आज हाशिये पर चले गए हैं। इन्हें इस चुनाव में महज तीन सीटें मिली हैं। बीस साल पहले लालू यादव को प्रचंड जन समर्थन मिला था, लेकिन वह सत्ता के मद में चूर थे। इनकी राजनीति जाति-धर्म पर केन्द्रित होकर रह गई थी। पूरे परिवार को विधायक-सांसद बना दिया था। बिहार की सड़कों पर अंधेरे में लोगों का निकलना दूभर हो गया। अपहरण ने उद्योग का रूप ले लिया था। राजद का कौन नेता कब किसे चोट पहुंचाएगा-कहना मुश्किल था। नतीजन, 1990 के दशक में अपराजेय माने जाने वाले लालू प्रसाद आज अस्वीकार्य हो गए। जदयू-भाजपा को 2010 के विस चुनाव में 206 सीट मिलना लालू को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं। वे इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं। 24 नवंबर 2010 की मतगणना के बाद अब तक लालू प्रसाद खुलकर कुछ भी नहीं बोले हैं। जदयू-भाजपा की बयार ने विपक्ष को ही साफ कर दिया। संविधान कहता है विपक्ष का नेता के लिए दस फीसदी सीट होना आवश्यक है। मगर राजद के पास सिर्फ 22 सीटें ही हैं। हां, राजद-लोजपा गठबंधन मिलाकर 25 सीटें पूरी हो जा रही हैं। लालू प्रसाद अब भी यदि अहंकार में चूर रहे तो आने वाले समय में इनका राजनीति अस्तित्व ही मिट जाएगा। नीतीश सरकार ने भी यह भांप लिया है कि जनता अब जाग चुकी है। उसे आश्वासन नहीं रिजल्ट चाहिए-वो भी फौरन। इसलिए वक्त यदि आपको ऊंची कुर्सी पर बिठाती है तो उसकी इज्जत कीजिए। अहंकार तो कतई नहीं, वर्ना कुर्सी कहां पटकेगी कहना मुश्किल है। वक्त ने यदि पावर दिया है तो उसका सही इस्तेमाल कीजिए।

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ravish के द्वारा
December 5, 2010

राबड़ी देवी उन्हें आश्वासन दे रही हैं। कुछ दिनों में लालू सदमे से बाहर निकल जाएंगे।

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    dhnaybad

ratan dev के द्वारा
December 5, 2010

iinteresting…

dilip के द्वारा
December 5, 2010

झारखंड बंटवारे के वक्त लालू ने कहा था कि उनकी लाश पर ही बिहार बंटवार होगा। चंद दिनों में फौरन मान गए। यह है लालू का चरित्र।

bhuneshwar के द्वारा
December 5, 2010

karwa sach

amar sexna के द्वारा
December 5, 2010

राजद सुप्रीमो कब कौन सी बात कहेंगे, कब पलट जाएंगे कहना मुश्किल है।

prabodh के द्वारा
December 5, 2010

very interesting

putul के द्वारा
December 5, 2010

accha lika hai

salil के द्वारा
December 5, 2010

लालू कुछ दिन बाद फिर नये रूप में दिखेंगे। फिर दावा करेंगे कि उन्हीं की सरकार बनेगी, फिर इससे भी कम सीटों पर सिमट जाएंगे।

sunil jha के द्वारा
December 5, 2010

nice

lalit के द्वारा
December 5, 2010

जिदंगी का कटु सत्य का अहसास कराया है आपने। धन्यवाद

shailendra के द्वारा
December 5, 2010

अखबारों से भी लालू आउट हो गए हैं।

ranjana के द्वारा
December 5, 2010

very good post

manish के द्वारा
December 5, 2010

nice posting

sabnam के द्वारा
December 5, 2010

सही लिखा है। धन्यवाद

rishi के द्वारा
December 5, 2010

कुछ भी हो लालू में बदलाव नहीं आनेवाला।

rahul के द्वारा
December 5, 2010

राजद सुप्रीमो ने बिहार को ही डुबो दिया। नीतीश को नया बिहार बनाने में वक्त लगेगा।

kishor के द्वारा
December 5, 2010

मुझे तो हर नेता एक ही जात का लगता है। करनी-कथनी भी एक ही जैसी लगती है।

sinha के द्वारा
December 5, 2010

राबड़ी देवी का हारना लालू के लिए बड़ा झटका है। उनके हर दाव उल्टे होते जा रहे हैं। यदि अब भी नहीं संभले तो उनकी स्थिति और बदतर हो जाएगी।

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    thanks thanks

    punam के द्वारा
    December 5, 2010

    main bhi apki baaton se sahmat huan

rajeev के द्वारा
December 5, 2010

बड़ी कुर्सी मिलते ही लोग खुद को असामान्य समझने लगते हैं। सच कहा आपने।

pankan sharma के द्वारा
December 5, 2010

पासवान जी तो गुम ही हो गए। उन्हें या तो संन्याष ले लेना चाहिए या फिर किसी बड़ी पार्टी की शरण ले लेनी चाहिए।

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    pasand aaya dhanaybad

vijay के द्वारा
December 5, 2010

बेहतर लेख

vivek के द्वारा
December 5, 2010

रवि जी, काफी दिनों बाद आपका लेख ब्लाग पर आया। लिखते रहिए।

raushan के द्वारा
December 5, 2010

कड़वा सच

bragesh के द्वारा
December 5, 2010

लालू को अपनी करनी का फल अभी आनेवाला समय में मिलेगा। फिलवक्त टेलर चल रहा है।

    ranjan के द्वारा
    December 5, 2010

    hoshala badhne ke liye dhanaybad

vinay के द्वारा
December 5, 2010

सच की तस्वीर को अच्छे अंदाज में पेश करने के लिए धन्यवाद

mitthu के द्वारा
December 4, 2010

रवि जी आपका लेख पढा। पसंद आया। यूं ही लिखते रहिए।

mitthu के द्वारा
December 4, 2010

बढिया लिखा है।

siddarth के द्वारा
December 4, 2010

अभिमान में चूर लालू का व्यवहार किसी के साथ सामान्य नहीं है। इसी का प्रतिफल इन्हें मिला है।

eeshan के द्वारा
December 4, 2010

लालू यादव को काश ये बातें समझ में आती। सच को सच लिखने के लिए धन्यवाद

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    thanks for comments

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    thank you

rajesh के द्वारा
December 4, 2010

nice article

satyendra के द्वारा
December 4, 2010

बिल्कुल सच कहा आपने। काफी दिनों बाद आपका आलेख आया। निरंतरता बनाए रखें।

    ravikant के द्वारा
    December 5, 2010

    कोशिश रहेगी

Dharmesh Tiwari के द्वारा
December 3, 2010

आदरनीय रविकांत जी,बुजुर्गों का कहना बिलकुल सही है धोखा और झूठ ज्यादा दिन नहीं चल सकता आज जो राजद के साथ हुआ वो इसी का एक जीता जाता उदहारण है,आज जनता ने अपने जागरूकता का परिचय दिया है और सबको बता दिया है की मालिक वही होगा जो मालिक बनने के योग्य होगा,जनता के ऐसे फैशले को नमन,धन्यवाद!

    ravikant के द्वारा
    December 4, 2010

    thanks

    sanjay के द्वारा
    December 5, 2010

    apki baat sahi ha


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