जरा हट के

Just another weblog

52 Posts

635 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 212 postid : 96

भ्रष्टाचार मिटाने को हर घर में चाहिए एक अन्ना

Posted On: 19 Apr, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार का मुद्दा क्या उठाया। छुटवैये नेताओं के पर निकल आए। विपक्ष को बड़ा चुनावी मुद्दा मिल गया। मीडिया को प्रोडक्ट बेचने के लिए मसाला। अफसरों ने भी मिलायी हां में हां। ऐसा लगा कि पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हो गया है। ऐसे लोगों ने भी आवाजें बुलंद की, जिनपर भ्रष्टाचार के अनगिनत मामले चल रहे थे। गौर करने वाली बात है कि एसी रूम में बैठकर ‘सोने की आंख’ से देखकर जनता के सामने जो आंकड़े पेश किए गए, वे सच्चाई से कोसों दूर हैं। इस बात को सोचना होगा, समझना होगा? उन्हें भी जो भ्रष्ट हैं, उन्हें भी जो भ्रष्टों को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें भी जो उन्हें बचा रहे हैं? क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे द्वारा जलाया गया दीया आगे मशाल बनेगी या बुझ जाएगी, यह सवाल सबके मन में है, जवाब भी हरेक के पास है, यह अलग बात है कि सच को झुठलाना चाहते हैं? बेशक ! भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए हर घर में एक अन्ना हजारे को जन्म लेना होगा। क्योंकि भ्रष्टाचार की जद में जाएं तो कुछ पैसों के लिए लिए चाय की दुकान से मल्टीप्लेक्स, चपरासी से अधिकारी तक कहीं न कहीं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। भ्रष्टाचार से नाता न रखने वालों की संख्या भी काफी है। मगर, ये बढ़ावा देने में कहीं न कहीं जरूर शामिल हैं। क्या सिनेमा देखने के लिए हम ब्लैक टिकट नहीं खरीदते, क्या बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाने के लिए घूस देने के लिए तैयार नहीं रहते। वास्तव में भारत में भ्रष्टाचार हर व्यक्ति के दिल व दिमाग में किसी न किसी रूप में अपना घर बना चुका है, जिसे तोडऩे के लिए लगातार कोशिश करनी होगी। बताते चलें कि यदि वेतन के पैसों से कोई आईएएस भी शहर में एक मकान बनाना चाहे तो बीस साल पैसे जोडऩे होंगे। फिर पांच साल में ही कोई आईएएस करोड़ों का मकान कैसे खरीद लेता है? विधायक बनने के पूर्व पैदल चलने वाले कई नेता, एमएलए बनते ही चार चक्के की गाड़ी पर घूमने लगते? थाने का मामूली दारोगा का बेटा देहरादून कैसे पढ़ता है, जबकि उसके वेतन के बराबर वहां फीस देनी पड़ती है? चिकित्सक पांच साल में ही करोड़पति कैसे बन जाते? मंत्री बनते ही नेताओं के पास एकाएक पैसे कहां से बरसने लगते ? चुनाव में करोड़ों खर्च करने वाले नेता शपथ पत्र में खुद को कंगाल दिखाते, फिर पैसे कहां से आते ? क्या बिना घूस दिए पासपोर्ट बनवाया जा सकता है? क्या बिना रुपये दिए ड्राइविंग लाइसेंस बन जाते हैं? बिना पैसे कितने दिनों में और देकर कितने दिनों में? क्या रेलवे का कोई ऐसा टीटीई होता है, जिसकी आमदनी लाख में नहीं होती? ट्रेन में बर्थ रहते टीटीई कहता है सीट नहीं है? देखा जाए तो ऊपर से नीचे तक के लोग भ्रष्टाचार में इस कदर समा चुके हैं कि इनसे निपटना आसान नहीं है। आपको पता है कि निगरानी के अफसर भी घूस लेते हैं? भ्रष्टाचार की जांच को बने अफसरों की संपत्ति की जांच की जाए, तो इक्के-दुक्के छोड़कर सभी करोड़पति हैं। नीचे वाला क्लर्क मंथन करते वक्त यही सोचता है कि उसके साहेब भी तो घूस ले रहे हैं। सो, थोड़ा लेने में बुराई नहीं। ऐसे में किसके पास की जाए शिकायत, कौन सुनेगा और कुछ करेगा। सिर्फ डर से भ्रष्टाचार का खात्मा असंभव है। इसके लिए आत्मा को टटोलना होगा। क्या लेकर आए थे, क्या लेकर जाएंगे-इसे भाव को जगाना होगा। शपथ लेना होगा कि थोड़े से फायदे के लिए हम घूस नहीं देंगे। अन्ना के सुर में सुर मिलाना होगा-ये अन्ना तुम चिराग लेकर चलो, हम पीछे हैं। बापू तुम भी देखो, हम बदल रहे हैं।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.17 out of 5)
Loading ... Loading ...

13 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Vivekinay के द्वारा
April 29, 2011

सत्य है यदि हर इन्सान मैं एक अन्ना हजारे के विचार हो तो देश क्या हो………….. सोचने मैं बहुत अच्छा लगता है रवि जी . अच्छी रचना

vinitashukla के द्वारा
April 20, 2011

यह सच है कि आम जनता में भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता की कमी रही है, तभी तो भ्रष्ट आचरण पूरे देश में फलता -फूलता रहा है. हाल में हुए आन्दोलन से लोग जागे अवश्य हैं पर इस मशाल को जलाये रखने के लिए, हम अपने दिलों में क्रांति की चिंगारियों को बुझने न दें, तभी कुछ हो सकेगा. डर है, वक़्त के साथ साथ ये आग ठंडी न पड़ जाए. सार्थक पोस्ट पर बधाई.

    ravikant के द्वारा
    April 20, 2011

    thanks for comments

subhash के द्वारा
April 19, 2011

good post we need new revolution a sampurn kranti

    ravikant के द्वारा
    April 19, 2011

    thank you very much

rkpandey के द्वारा
April 19, 2011

आदरणीय रविकांत जी, एक सच जिसे खारिज नहीं क्या जा सकता. आए दिन ऐसे वाकए दिखाई देते हैं जिनका कोई हल हमारे पास नहीं होता. आत्मा को मार कर ग्लानि भाव को दफ्न कर दिया है समाज ने ताकि कहीं भीतर कहीं कोई हलचल ना हो. सब अपना काम साध रहे हैं तो फिर सुधार की गुंजाइश कहॉ से बनेगी. एक बहुत अच्छी रचना के लिए आपका आभार.

    ravikant के द्वारा
    April 19, 2011

    dhnaybad

Anupam sharma के द्वारा
April 19, 2011

किसी बीमारी को ठीक करने के लिये मरीज को खुद कोशिश करनी पडेगी,डॉ्कटर सिफॆ दवाई दे सकता है । 

April 19, 2011

फिलहाल, अपन को तो किसी अन्ना की जरूरत नहीं…

manish के द्वारा
April 19, 2011

interesting

rajesh के द्वारा
April 19, 2011

nice post

मनोज के द्वारा
April 19, 2011

भ्रष्टाचार मिटाने के लिए हर घर में अन्ना की नहीं बल्कि हर इंसान में एक अन्ना की जरुरत है तभी देश से भ्रष्टाचार का दीमक जा सकता है वरना यह तो देश को खाने मॆं तुला हुआ है.

    ravikant के द्वारा
    April 19, 2011

    thanks


topic of the week



latest from jagran