जरा हट के

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Ravikaant


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भगवान, ये अमीर व वीआईपी हैं…!

Posted On: 5 Mar, 2010  
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चेतिए! बच्चे देख रहे ‘पॉर्न साइट’

Posted On: 4 Mar, 2010  
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एक गलती सौ अच्छाइयों पर भारी

Posted On: 3 Mar, 2010  
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आस्था से हारी मृत्यु, जीता आतंक

Posted On: 24 Feb, 2010  
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इन ‘ललबबुओं’ को चाहिए तरक्की

Posted On: 23 Feb, 2010  
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नेताजी की नजर…ये इंसान नहीं हैं!

Posted On: 21 Feb, 2010  
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आग लगे पर अपना घर न जले

Posted On: 20 Feb, 2010  
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बॉस सावधान! चमचों से बचिए

Posted On: 18 Feb, 2010  
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बिहार की बेटी पर लखनऊ में जुल्म

Posted On: 16 Feb, 2010  
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नम आंखों में सवाल, कब मिलेगा न्याय…

Posted On: 13 Feb, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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पाकिस्तान की तालीबानी सोच उसके नेतृत्व की देन है। "घास की रोटी खाएंगे, फिर भी परमाणु बम बनाएंगे" जैसे नारों के से वे अपनी अवाम को भारत के खिलाफ भड़काते आए हैं। भारत का विरोध ही वहां सत्ता तक पहुंचने का आसान रास्ता माना जाता है। वे आतंक को बढ़ावा देकर दुनिया को अस्थिर कर चुके हैं। उनके लिए भारत को मात देने की हर खूनी कोशिश जायज है। आतंकी घटनाओं में खून चाहे भारत के लोगों का बहे या फिर पाकिस्तानी अवाम का, हर बार मानवता कराहती है। पाकिस्तान की असाधारण मदद करने वाले अमेरिका और चीन जैसे देश अपने निहित स्वार्थ के लिए ऐसा करते हैं। अपने स्वार्थ के लिए ही वे मदद घटाते-बढ़ाते हैं। उन्हें ये सोचना चाहिए कि उनकी दी हुई सहायता पाकिस्तान में विकास के लिए कारखाने खोलने में इस्तेमाल होती है या फिर आतंक की फैक्ट्रियां स्थापित करने में।

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किसी ने टीआरपी बढ़ाने के लिए ड्यूटी समय से यदि एक घंटा ज्यादा काम करना शुरू किया तो किसी ने चार घंटा। खुबसूरत व्याख्या की है आपने TRP की ............... और ऊपर उठाये विषय भी जैसे ......... अश्लीलता दिखाने वाले चैनल दोषी हैं या फिर उनसे ज्यादा हम? अश्लील फिल्म बनाने वाले ज्यादा दोषी या छिपकर, ब्लैक में टिकट खरीदकर देखने वाले? कोठा पर बैठी वेश्या दोषी या फिर उसे वहां बिठाने वाले सफेदपोश या फिर उसके यहां छिपकर जानेवाले? पर इन तर्कों से इनको उचित भी नहीं ठराया नहीं जा सकता .............. क्यूंकि आजकल कई घरों में बच्चे अकेले ही रहते हैं........... माता पिता दोनों जॉब वाले हैं.... तो एक बच्चा इनको नहीं समझ सकता की ये गलत हैं या सही वो केवल ये सोचेगा की ये जो लोग जिस तरह से बात करते हैं गली देते हैं............ वो ठीक ही होगा अन्यथा टेलीविजन पर क्यों आते........... और वो भी उसी तरह की भाषा सीखेगा ............

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

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रवि जी, नमस्कार....। आप बड़े ही धुरंदर नजर आ रहे है..। यथार्थ को जिस तरह से परोसता है वह बड़ा ही जीवंत है। मगर जहां का जिक्र कर रहे है, वहा पर ऐसा होता होगा..लेकिन हमारे पंजाब में इतने निरंकुश लोग नहीं है। मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं. वहां पर भी मुझको ऐसे यथार्थ का दर्शन नहीं हुआ है। यह सच है कि मरने से पहले लोग जिसे पानी पी पी कर गरियाते रहे है..मरने के बाद उसके यार दोस्त और दुश्मन तक गाली जैसे शब्दों से परहेज करने लगते है। डोम की दबंगई का जो चित्रण आपने किया है, वह बिहार जैसे प्रांत की सच्चाई को उजागर तो करता है..लेकिन उसे बदनाम कितना करता है..इसका साइड इफैक्ट उन बिहारी लोगों पर पड़ता है जो देश के अन्य प्रदेशों में कामकाज र रहे होते है। उनको भइया और न जाने कैसे कैसे भद्दे शब्दों से अलंकृत करते है उस प्रदेश के मूल निवासी। कृपया इस तरहे के लेख इस ब्लाग पर न लिखे जो हिंदी भाषी लोगों के लिए गले खी फांस बने। एकाध घटना उस कुल की संस्कृति नहीं बया करती है। इसलिए भविष्य में ऐसा फिर नहीं करेंगे..इसी आशा के साथ मैं आपकों पुन अभिवादन करता हूं।

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रवि भैया शायद आपको पता नहीं राज ठाकरे और उसके ताऊ तथा बड़े भाई मानसिक रूप से बीमार हैं और शायद वह शिव सैनिक के रूप में यह समझते है की उनकी फैमिली ही शिवाजी का अवतार हैं \\ पता नहीं वह अपने को मराठा किस प्रकार से सिद्ध करने की कोशीस में लगे रहते है जब की वह और उनके पूर्वज मध्य प्रदेश के इंदोर के रहने वाले थे जिस प्रकार वह और उनके पूर्वज रोजी रोटी की तालाश में मुंबई आकर बस गए थे उसी प्रकार से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी लोग भी अपने बच्चों के पेट भरने के लिए मुंबई तथा महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों में निवास कर रहे हैं तथा किसी भी स्थानीय व्यक्ति से अधिक मराठी हैं? ठाकरे एंड कंपनी को केवल पढ़े लिखे तथा व्यापर करने वाले गैर मराठी लोंगो से ही दुश्मनी है मजदूरों से उन्हें कोई गुरेज नहीं है क्योंकि स्थानीय मराठी शारीर तोड़ मेहनत का कार्य नहीं कर सकता तो बढ़ी -२ बहु मंजिल इमारतें कौन बनाएगा वैसे भी वह तो केवल हफ्ता वसूली करने वालों के विरोध में ही खड़े हुए थे तथा वह कार्य जब अपने पास ही है तो विरोध करने का कुछ साधन तो चाहिए ही ठाकरे एंड कंपनी शेर की तरह केवल मुंबई और महाराष्ट्र में ही दहाड़ सकते हैं महाराष्ट्र के बहार भी तो बहुत बढ़ा देश है कभी कुएं से बहार भी झांक कर देखो तो पता चलेगा की शारीर की चड्ढी भी उतर जायगी वैसे तो यह सब वोट बैंक की ही राजनीती है इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं पर इसकी चपेट में केवल गरीब ही मरता है अत; सरकार को चाहिए की ऐसे लोगों पर देश द्रोह का मुकद्दमा चलाना चाहिए जो देश में वैमनष्य फैलाते हैं और इनका एक ही स्थान होना चाहिए जेल वैसे ठाकरे एंड कंपनी को मेरा निमंत्रण की कभी वह उत्तर प्रदेश के मेरठ में आयें तथा मेरा अतिथित्य स्वीकार करे तो उनको सौहार्द पूर्वक व्यहार एवं रहने का सलीका पता चलेगा []]]]]]]]] एस.पी. सिंह , मेरठ

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यह writer ne सच लिखा है किसी भला होजये किसी का बिगड़ेगा परन्तु कभी कभी उल्टा भी होजये उन्बतो को चारोंतरफ से ही सोच विचार कर किया जाये जवानी की उमर मे कुछ धन के लालच मे सारा कियाकर्ये पैर पानी न बह जाये इस का भी ख्याल रखना ज़रूरी है कोई भी काम करो दलाल बिच मे जो मेहनत करनेवालों का हक मार्लेय्तेय है यह बात बहुत बुरी है सर्कार को जब मालूम है की बेरोजगार को काम नहीं डे पढ़ी तब वास्तव मे ही उसको इस काम की कानूनी मान्यता देने मे कोई हर्ज़ नहीं होना चहिये किसी का भिव्सय सुधेरे किसी घर बसे कोई गलत आत नहीं कर भला हो भला यह kahabat यहाँ सही सिद्ध होती है कुछ बुरे है पैर ज़िन्दगी जीने का कोई साधन है फिर कोई बुरी बात nahin

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"आदिमानव काल में क्या कोई ऐसी व्यवस्था थी कि हम आर्थिक स्तर पर किसी को गरीब या अमीर कि संज्ञा दे सके.यह बात अलग है कि, उस समय का मानव बौद्धिक दृष्टी से इतना समृद्ध और वैज्ञानिक दृष्टि से इतना सक्षम भी नही था जितना वह आज है.ऐसा लगता है मानो संसार से भावना और मानवता विदा हो चुकी है.रह गया है तो केवल-और- केवल पैसों का खेल!! जनता अपने आधिकारों के लिए परेशान है मगर,यही जनता स्वयं के कर्तव्यों से मुख मोड़ चुकी है.गरीबी और अमीरी कि खाई पाटने में सरकार भी अकर्मण्यता दिखा रही है या मजबूर है. मेरे ख्याल से यह खाई तभी पति जा सकती है जब इंसान में फिर से मानवता और संवेदना जाग जाये." (http://chattrapatiankur.jagranjunction.com)

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रविकांत जी, बहुत खूब लिखा आपने. राहुल गाँधी सही मायने में एक सच्चे राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि एक ऐसे कूटनीतिज्ञ हैनं जो हमेशा वोट की राजनीती करते हैं और भरसक वोट पाने में कामयाब भी होते हैं . राहुल की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क होता है . भरोसा न हो तो इतिहास पलट लो. बिहार में बिहारियो की तरफदारी करने वाले राहुल ने की कांग्रेसी सरकार ने राज ठाकरे को आग उगलने से रोकने के लिए क्या इन्तेजामात किये हैं ? कोई बताएगा मुझे ? महामहिम सुप्रीम कोर्ट के तमाम आदेशों के बावजूद राज खुले आम घूम रहा है. खुद की पार्टी द्वारा शासित महाराष्ट्र के विदार्व के आंसू छोड़ वोट की खातिर उत्तरप्रदेश के किसानो के लिए बहने वाले राहुल के आंसू में क्या मायावती विरोधी पुट नहीं है? रविकांत जी आप प्रबुध्ध हैं. कृपया बताये ? राहुल ने महाराष्ट्र में बिहारियों की सुरक्षा के लिए क्या किया है ?

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बहुत बढिया। लेकिन दुखद व चिंताजन। न जाने मेरे मन में काफी दिनों से एक बात कौंध रही है कि क्‍या आज की नई पीढी इतनी कम उम्र में वह सभी जानकारी हासिल कर लेती है जो हम अपने जमाने में वर्ग सात आठ तक भी नहीं जान पाते थे। हमारी बिटिया चौथे साल में प्रवेश की है। उसके अजब गजब के सवालों के जवाब देते देते परेशान रहता हूं। अभी कुछ ही दिन पहले स्‍कूल जाना शुरू की है। ए से जी तक सिखी है और वन से फाइव तक। लेकिन उसके सवाल का सबसे बडा प्रश्‍न का स्रोत टीवी बनता है। हालांकि मैं उसे अपने जवाब से संतुष्‍ट करने की कोशिश करता हूंत्र सबसे बडी बात यह है कि जितने तेजी से वह एबीसी नहीं सीख पा रही है कहीं उससे तेजी से उसके हाथ माउस पर थिरक रहे हैं। खौर नई तकनीक के बच्‍चे हैं अभिशाप और वरदान दोनों ही साथ साथ चलेंगे धन्‍यवाद

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रविकांत जी, ‌आप सोच रहे होंगे कि राहुल सक्सेना ने कमेंट देना ही बंद कर दिया। परंतु इसके पिछे छिपी मजबूरी को आप समझते होंगे। दिन में तो वक्त ही नहीं मिलता। रात में लैपटाप खोलते ही चारों साथियों में झगड़ा होने लगता है कि बेहतर कमेंट कौन देगा। इसके बावजूद यदि कमेंट नहीं मिला तो मान लीजिए कोई समस्या सामने आ गई। मेरा मानना है कि आप रिपोर्टर न होने पर भी इस धर्म का पालन ब्लाग लेखक के रूप में बखूबी कर रहे हैं। करना भी चाहिए। डेस्क का आदमी शिथिल हो जाता है जबकि उसके पास गहर डेप्ट होता है। आपका यह लेख हम सब पुराने सा्थियों को पसंद आया। लगता है कि हम सब पर ही यह घटना घटी हो। हमलोगों ने भी समस्याऒं से लंबे समय तक संषर्ष किया है। शुभकामनाऒं के साथ

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रविकांत जी आपके द्वारा लिखा हुआ ये पहला लेख हे जो में पढ़ रहा हु . शायद इस लेख के हेडिंग ने मुझे इसे पढने पर मजबूर किया . लेकिन लेख पढ़कर लगा मेने आप तक पहुँचने में थोडा वक़्त लगा दिया पाकिस्तान में जसपाल सिंह और महाल सिंह के साथ जो कुछ हुआ वो वाकेई पूरी इंसानियत को शर्मसार करने के लिए काफी हे ऐसे हालात में हमारी सरकार को दो टूक शब्दों में पकिस्तान को जवाब देना चाहिए कोई वार्ता नहीं कोई मीटिंग नहीं सीधे कारवाही होनी चाहिए , अगर ऐसा नहीं होता हे तो वाकेई हम दुश्मन को अपनी कमजोरी का एहसान ही कराएगे . आपने अपने लेख द्वारा सभी को ये एहसास दिलाया हे के दुश्मन हमारे साथ कोई हमदर्दी नहीं करता और हम दोस्ती की बाते करते रहते हे . आपको सभी ने खूब कमेन्ट किये हे . आपके इस लेख को आशीष शर्मा जी ने भी अच्छा कमेन्ट किया हे . इस ब्लॉग के माध्यम से में अपने भाई आशीष जी को ये बताना चाहता हु के में एक मुसलमान हु और इस देश का एक ज़िम्मेदार नागरिक हु मुझे भी अपने भारत देश से उतना ही प्यार हे शायद जितना आपको हे फिर आप मुसलमानों से क्यों कोई अपेक्षा नहीं रखते क्यों आप भी वो ही काम कर रहे हे जो हमारा दुश्मन आपसे करवाना चाहता हे देश को तोड़ने का काम आपके द्वारा करवा कर वो हमें कमज़ोर करना चाहता हे . में आपको एक मुसलमान होने के नाते ये यकीन दिलाता हु अगर देश को बलिदान की ज़रूरत पड़ी तो पहले इस देश के मुसलमान का खून काम आयेगा . आपसे निवेदन हे के आप अपनी सोच को बदले और अपने दिल से ये ज़हर निकाल दे.

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आदरणीय रविकांत जी, मैं बता दूं कि गूगल में आप छा गए हैं। आपके नाम डालते ही आपका पन्ना दिखने लगता है। यह आपकी एक बड़ी उपलब्धि है। अखबार में काम करने के बाद भी आप समय निकाल कर कुछ लिख लेते हैं। यह बड़ी बात है। परंतु, इसका फायदा आपको भविष्य में जरूर मिलेगा। अनामिका के जिंदगी के सच कथा को उजागर कर आपने अच्छा काम किया है। इसे पढ़ने से लोगों की आंखें जरूर खुलेंगी। ऎसी बहनों पर भी असर पड़ेगा, जो ससुराल से लड़ मैके आकर बस जाती हैं। यह सही है कि कुछ ससुराल वाले बुरा बर्ताव बहू के साथ करते हैं। ऎसी सास का मानना है कि उसकी सास ने भी उसे प्रताड़ित किया था। इसे क्या कहा जाए। परंतु दुखद है। शुभकामनाऒं के साथ

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raviji, why you are behaveing like raj and bal,marathas are also indians like biharies, do you think raj or bal are serving the cause of marathas, do you think that talibans are serving the cause of muslims, do u remember the opening words of film patton i think those were "no bastard has ever won a war by dying for his country" har koi chahta hei ek mutthi aasman,the happiest moment for raj and bal will be when a maratha gets killed,and their vote banks unite, if we try to unite hindues(for the purpose of getting their uhcut vote bank) we shall be the happiest persons if hindues are put to trouble,muslims leader ship feel happy when muslim common men are in trouble, if lalloji didn't bake his bread by alineating yadavs and muslim from others, we the commoners are at best, the fuel for the ovens of political parties. bakthacrey is running his political train in back gear, he was respected by indians, then he was respected by hindus, now he is respected?by like minded marathas, by those marathas who may not be in love with hindues or bharties, time has already come when he can coviniently find his opponents even at matoshree, donot forget raj,and smita, the days are not far when he will meet his aurangzeb at matoshree itself, acouplet from Iqbal, tumharri tehzeeb apnei khanzar sei aap khudkushi kar legi, jo shakei naazuk pei aashiyan hoga napaidar hoga. tulsidas has said bandhuin bahori bahugan satibhaien, jo bin kaaj na dahein baayein--------------------udaiketu sam hit sabhikei, kumbhkaran sam sovat neeke,

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मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. अमेरिका की नीति है ' चोर को कह दो चोरी करे और साहूकार को कह दो जागता रहे ' इस प्रकार दोनों को बेवकूफ बनाया जाता है. औपनिवेशिक ताकतों की यह नीति रही है कि बांटो और राज करो . भारत और पाकिस्तान के नेता अपने निहित स्वार्थों में इस प्रकार उलझे है कि अमेरिका के इस खेल को समझना नहीं चाहते. चीन नें इस खेल को समझा है, इस कारण वह अमेरिका की परवाह नहीं करता है. अमेरिका उसके सामने मिमियाने को विवश है..कहा गया है ' वीर भोग्या वसुंधरा ' . मेरी समझ से एक बात और भी है. अमेरिका अफगानिस्तान में अपने बुने हुए जाल में फंस गया है. वह वहाँ से निकलने का कोई सम्मानजनक रास्ता ढूंढ रहा है. अपनी चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने चीन को सुपर पावर स्वीकार कर लिया है चीन नें पाकिस्तान में सैनिक अड्डे खोलने का मंतव्य व्यक्त किया है. मुझे लगता है अमेरिका और चीन में कुछ गुप्त सांठ - गाँठ हो गयी है कि अमेरिका दक्षिण एशिया की दरोगागीरी / चौधराहट चीन को सौंपने को तैयार हो गया है. इससे चीन का भारत को घेरने का उद्देश्य भी पूरा हो जायेगा. चीन अपने सुपर पावर बनने में भारत को बाधा समझता है. हमें सावधान रहना होगा.

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रवि जी, हम संवेदनशीलता खो चुके हैं, और हमारी सरकार मैं पदासीन महानुभाव जानते हैं की वर्तमान मैं कोई खतरा उनकी कुर्सी को इस लिए भी नहीं की विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करने के लिए कोई तैयार नहीं. हमारे देश के सर्वोच्च उन्नत राज्य के मुख्या मंत्री नरेन्द्र मोदी जी जब इस मंहगाई के ऊपर और सरकार की संवेदन शीलता के ऊपर प्रश्न करते हैं तो ,निहायत ही बेहूदगी के साथ श्रीमान मनीष तिवारी जो की कांग्रेस की तरफ से प्रवक्ता हैं ....कहते हैं की मोदी सठिया गए हैं , पागल हो गए हैं. कृपया आप हमारी तरफ से उनसे एक प्रश्न पूंछे की इस पागल और सठियाये हुए आदमी की पहचान गुजरात है...और कांग्रेस की अकलमंदी और अच्छे shashan का प्रतीक आम आदमी के आंसू हैं. कांग्रेस की एक बात अच्छी लगी ....रो तो सही पैर आवाज मत कर

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